क्यों नासा में टीपू सुल्तान की तस्वीर हैं ?

0
33


टीपू सुल्तान ने की थी रॉकेट की खोज। टीपू सुलतान ने 17वीं सदी में रॉकेट का विकास किया था जिसने जंग में अंग्रेज़ों को हार का स्वाद चखाया था। मैसूर के शाशक टीपू सुल्तान और उनकी सेना ने एंग्लो-मैसूर जंग के दौरान पहली हतियार बंद राकेट बनाई थी। टीपू सुल्तान के इस हथियार को देख कर ही अंग्रेज़ों ने रॉकेट की खोज की टीपू सुल्तान और उनकी सेना के योगदान की वजह से नासा में सेना की तस्वीर भी लगी है। 17वीं सदी में हुए एंग्लो-मैसूर जंग का दौरान टीपू सुल्तान और उनकी सेना ने इस राकेट का इस्तेमाल किया था। ये रॉकेट आज के अंतरिक्ष भेजे जाने वाले रॉकेट से बिलकुल अलग थे इनका इस्तेमाल जंग की मैदान में होता था।मेटल ट्यूब के अंदर बारूद भर उसे एक छोर से बंद किया जाता तह और दूसरी छोर को गैस के प्रयोग से चलाया जाता था। इन रॉकेट्स में सिर्फ बारूद नहीं बल्कि तलवार भी होते थे तलवार के इस्तेमाल से सेना एक तीर से दो निशाने लगाती थी। तलवार से रॉकेट की स्थिरता मिलती थी और उड़न के अंत में दुश्मनों को मार गिराने वाली हथियार, रॉकेट के गिरने की वजह से भी विरोधियों के सैनिक मारे जाते थे। टीपू सुलटन के इस हतियार ने दुश्मनों के दिल में खौफ पैदा कर दी थी इस हतियार से उन्होंने कई जंग जीते और जब उनकी ये हतियार ज़ब्त कर ली गई इसका इस्तेमाल एंग्लो-अमेरिकी जंग में किया गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here