क्यों बी आर अम्बेडकर बौद्ध धर्म में बदल गए ?

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महान नेता बी आर अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल १८९१ में महो सेना छावनी, केंद्रीय प्रान्त , मध्य प्रदेश में हुआ था। अम्बेडकर न सिर्फ एक नेता बल्कि भारतीय न्यायवादी, राजनेता, और समाज सुधरक भी थे। अम्बेडकर की ज़िन्दगी आसान नहीं थी, उनका जन्म महार जाती में हुआ थे जिसे ऊपरी वर्ग के लोग अछूत मानते थे। बचपन से ही अम्बेडकर छुआछूत से जुज रहे थे, और बड़े होने पर भी इसमें कुछ ख़ास अंतर नहीं आया। लेकिन इन सभी व्याख्याओं का उनकी ज़िन्दगी पर गहरा असर पड़ा।

साल 1897 अम्बेडकर पहले अछूत बने जिनका दाखिला मुंबई के एल्फिंस्टोन स्कूल में हुआ, इस स्कूल से मेट्रिक करने वाले भी वो पहले अछूत थे। अम्बेडकर का विवाह भी बहुत ही कम उम्र में हुआ , वो महज 15 साल के थे जब उनका विवाह 9 वर्षीय रमाबाई से हुआ। बी आर अम्बेडकर ने काफी पढाई की और साल 1915 में उन्होंने अपनी एमए की पढाई पूरी की जिसके बाद साल 1918 रूचि राजनीती की ओर बढ़ने लगी। देश को छुआछूत की बिमारी से मुक्त करवाने और निचले वर्ग के लोगों को न्याय दिलवाने के लिए उन्होंने कई लड़ाइयां भी लड़ी।

बाबासाहेब ने 1927 में छुआछूत के खिलाफ सक्रीय आंदोलन किया, बाबासाहेब मानते थे की समाज में अछूतों को बराबरी बौद्ध धर्म में परिवर्तित हो कर ही मिलेगी। और साल 1956 में उन्होंने खुद को बौद्ध धरम में सार्वजनिक रूप से परिवर्तित कर लिया। बी आर अम्बेडकर ने समाज में निचले वर्ग को इन्साफ दिलाने के अलावा भारत के संविधान को बनाने में भी अपना योगदान दिया था। बाबासाहेब की मृत्यु 6 दिसंबर 1956 में हुई और 1990 में उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए उन्हें भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया।

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