जब कुत्तों को बचाने के लिए वर्ष 1832 में कुत्ते दंगे हुए

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मुंबई का सबसे पहला दंगा 1832 में कुत्तों के लिए हुआ था। सुनकर अजीब सा लगा ना ? लेकिन मुंबई में हुए इस दंगे को “डॉग रायट ऑफ़ 1832” के नाम से जाना जाता है। जब देश में ताकत पाने की लड़ाई हो रही थी मुंबई के निवासियों ने ब्रिटिशों के खिलाफ कुत्तों के लिए जंग छेड़ दी थी। दरअसल मई 1832 में पुलिस मजिस्ट्रेट ने 1813 के नियम के तहत आवारा कुत्तों को मारने का आदेश दिया था। इन कुत्तों को मारने के लिए उस वक़्त आठ आने दिए जाते थे। परिस्थिति तब बिगड़ी जब पारसियों ने इसके खिलाफ आवाज़ उठाई।

वजह ये थी की पारसियों में कुत्तों का बहुत सम्मान किया जाता था। माना जाता था इस प्राणी के एक नज़र से बुराई खत्म हो जाती है और ये स्वर्ग के द्वारपाल भी होते हैं। बस फिर क्या था अंगेर्जों ने उनकी नहीं सुनी और 6 जून को करीब 200 पारसियों ने सड़कों पर विरोध प्रदर्शन की शुरुआत कर दी और जल्द ही उनके साथ अन्य समुदाय के लोग भी जुड़ गए। दुकाने बंद की गयी काम रुक गए पुलिस और लोगों के बीच झड़प हुई। और इसे रोकने के लिए कुत्तों को मारने की जगह बस पकड़ने का फैसला लिया गया। इतिहास में ये घटना भले ही खो गई हो लेकिन इंसानियत और विश्वास की ये कहानी भारत की नीव है। आप कुत्तों से कितना प्यार करते हैं ?

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