जानिए आखिर क्या है पेरीमीनोपॉज़ ?

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पेरीमीनोपॉज़ जिससे मीनोपॉज ट्रांजीशन भी कहा जाता है। लेकिन “पेरीमीनोपॉज़” आखिर है क्या ? आइये जानते है।
जब किसी महिला का शरीर अपनी प्रजनन शक्ति को स्थायी रूप से बंद ( मीनोपॉज )करने के संक्रमण से गुज़र रहा हो उस ट्रांजीशन को पेरीमीनोपॉज़ कहा जाता है।

पेरीमीनोपॉज़ के समय प्रमुख स्री हार्मोन यानी के “एस्ट्रोजन ” का स्तर तेज़ी से घटता,बढ़ता है। और इसके चलते महिलाओ में मासिक स्राव हल्का या अधिक हो सकता है। वैसे तो ज़्यादातर महिलाओ में पेरीमीनोपॉज़ की शुरुवात 40 के दशक में अलग-अलग समय पर होती है।

लेकिन कुछ महिलाओ में इसके परिवर्तन जल्दी दिखाई देने लगते है। अर्थात मध्य 30 की आयु में भी बहुत सी महिलाए पेरीमीनोपॉज़ अनुभव कर सकती है।

पीरियड्स की ही तरह पेरीमीनोपॉज़ का अनुभव और उम्र हर मलीहा के लिए अलग अलग होता है। इसकी औसत समयावधि 3 से 4 वर्ष की है , लेकिन ये कुछ महीनो से लेकर 10 वर्षो तक लम्बा हो सकता है। यानी के विभिन्न महिलाओं के लिए अवधिकाल भी अलग अलग होता है।

जब लगातार 12 महीनो तक मासिक चक्र ना हो तो पेरीमीनोपॉज़ समाप्त होकर “मीनोपॉज़” शुरू हो जाता है।

अवधिकाल वैसे एस्ट्रोजन स्रावित करने वाली ग्रंथियों के स्वास्थ पर भी निर्भर करता है। पेरीमीनोपॉज़ के लछण भी विभिन्न महिलाओं में अलग -अलग होते है और इसका कारण भी एस्ट्रोजन के स्तर और वातारण पर निर्भर करता है।

एस्ट्रोजन के कम स्तर से सम्बंधित अगर अनियमित या विलंबित मासिक चक्र हो तो मिजाज़ का बदलता रहना और शरीर में भी बहुत से परिवर्तन होते रहते है।

यदि आपको लछ्ण गंभीर लग रहे है तो हार्मोन बदलाव चिकित्सा की सलाह दी जाती है। बदलते मिजाज़ की चिकित्सा हेतु दूसरी ओषधियाँ बताई जा सकती है। किसी भी समय यदि आपको यह नार्मल से अलग महसूस हो रहा हो तो अपने डॉक्टर से सुझाव लेने से बिलकुल ना घबराए।

 

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