मोदी केयर स्कीम से क्यों बहार गया पश्चिम बंगाल ?

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पश्चिम बंगाल बन गया है पहले राज्य भारत का जिसने करदिया है मोदी केयर को मना। जी हाँ दोस्तों मोदी केयर’ से बंगाल की मुख्या मंत्री ममता बनर्जी ने खींच लिए है अपने हाथ, कहा- अपने पैसे बर्बाद नहीं करेगा बंगाल।

पहले आपको बता देते है की आखिर है क्या ये “मोदी केयर” ?

दोस्तों आपको बतादे की मोदी केयर एक एम एल एम (MLM) मलटी लेवलिंग मार्केटिंग कंपनी है , इसे १९९६ में स्थापित किया गया था | इसका यह मकसद है की लोगो को स्वस्थ जीवन और जिंदगी में बदलाव ला पाए ।

इस राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना के लिए साढ़े पांच से 6 हजार करोड़ रुपए के तहत केंद्र सरकार इस स्कीम में 2 हजार करोड़ रुपए को योगदान देगी, योजना के लिए बाकी राशि राज्यों को देनी होगी।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि बंगाल सरकार “स्वस्थ साथी प्रोग्राम” के जरिये पहले ही 50 लाख लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस दे रही है फिर क्यों वह एक ही समस्या पे दुबारा ‘मोदी केयर’ योजना के ज़रिये पैसे बर्बाद करे। उन्होंने इससे बाहर रहने का फैसला किया है |

उनका कहना है की यदि राज्य में पहले से ही ऐसा हेल्थ प्रोग्राम चल रहा है, तो हम अपने संसाधनों और पैसे को ऐसी ही एक और योजना पर क्यों बर्बाद करें? अगर राज्य के पास संसाधन होगा, तो वह अपनी ही स्कीम शुरू करेगी । मोदीकेयर को लागू करने से इंकार करते हुए ममता बनर्जी ने कहा यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने इस योजना की शुरुआत करने से पहले राज्यों से कोई सलाह नहीं ली।

जब के केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण ( 1 फरवरी) में नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम (एनएचपीएस) की घोषणा की और यह भी दावा किया कि दुनिया की इस सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना के तहत इतनी बड़ी आबादी हेल्थ इंश्योरेंस दिया जाएगा, जितना अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस मिलकर देते हैं |

डेरेक ओब्रिएन जो के तृनामूल कांग्रेस के राज्य सभा में लीडर भी है, उनका कहना है की बजट का प्लान फ्लॉप सा है और कहा की जो वो इस 2018 -19 के बजट में लेकर आए है वो ममता बनर्जी की गवर्नमेंट पश्चिम बंगाल में पालन कर ही रही है।

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