भारत में कुष्‍ठ रोगियों का ख्याल रखने वाले संत: बाबा आम्टे

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बाबा आमटे समाज को दिए अपने योगदान के लिए प्रख्यात हैं। संपन्न परिवार से होने के बावजूद बाबा आम्टे ने अपना जीवन लोगों की सेवा में लगा दी। उन्होंने अपना पूरा जीवन भारत में कुष्‍ठ रोगियों की मदद और सेवा में लगा दिया। बाबा आम्टे का असल नाम मुरलीधर देवीदास था और वो गांधीजी से बड़े प्रभावित भी थे। कुष्‍ठ रोगियों की मदद के लिए उन्होंने 1948 में 14 रूपए की लगत से पेड़ के नीचे आश्रम की शुरुआत की।

ज़रूरतमंद की मदद के अलावा उन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई भी लड़ी और 1942 में हुए भारत छोड़ो आंदोलन में भी भाग लिया। समाज सेवा के लिए बाबा आम्टे हमेशा आगे रहे नर्मदा बचाओ आंदोलन में भी। उन्होंने बढ़ चढ़ कर भाग लिया और नर्मदा के किनारे आश्रम बना कर आंदोलन का नेतृत्व किया। समाज में दिए उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1971 में पद्मश्री से सम्मानित किया। उनकी मृत्यु ल्युकीमिया होने के कारन 9 फरवरी 2008 में हुई। क्या आज के समाज में हमें और बाबा आमटे की जरूरत है ?

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