सालो बाद इन महिलाओं को मिली पद्मश्री

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3 महिलाए जिनकी मात्र कहानी सुनकर आप प्रेरित हो जाएंगे तीनो ने ही दशकों से संघर्ष कियाआखिरकार उन्हें उनके काम के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया इनमे बिहार की किसान चाची के नाम से मशहूर राजकुमारी देवी है जिसका घर से निकलकर आचार बेचना समाज को पचा नहीं अब उनके प्रोडक्ट्स विदेश जाते है250 महिलाए आज इसके साथजुड़कर आचार-मुरब्बा तैयार करती है दूसरी है झारखंड की जमुना टुडू जिन्हे टार्ज़न लेडी के नाम से जाना जाता है इनके बेहिसाब जोश के वजह से अब पूरा गांव पेड़ो को राखी बांधता है।इतना ही नहीं जमुना ने विवाह के वक़्त 10 पौधे,बेटी पैदा होने पर 18 पौधे रोपने की परम्परा शुरू करवाई उसके बाद है जर्मनी की फ्रेडरिक इराना ब्रूनिंग यानि सुदेवी माता जी। अभी इनके पास 1200 गाये है जो दूध नहीं देती।लोग बीमार या घायल गायों को आश्रम के बहार छोड़ के जाते है। फ्रेडरिक इनके इलाज और पालने का जिम्मा उठा रही है।41 साल की उम्र में वे लाखो गायों को पाल चुकी है।इसका खर्च भी वो बर्लिन में अपने पुश्तैनी संपत्ति से मिलने वाले किराए और यहाँ मिलने वाली दान से जुटाती है क्या आपको इन महिलाओं पर नाज़ है ?

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