बिना दुकानदार के चलती है ये ख़ास दूकान

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केरल के इस दूकान में नहीं बैठता कोई भी दुकानदार आपको लग रहा होगा इसमें कौनसी बड़ी बात है। बहुत सी मशीने भी होती ही है सेल्फ सर्विस की लेकिन बेटर इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार कन्नूर के पास अजिकोड में एक छोटी सी दूकान है। इस दूकान को जनशक्ति चैरिटेबल ट्रस्ट नाम के एन जी ओ ने शुरू किया है। ताकि वे अपने इलाके के निःशक्तजन के लिए कुछ बेहतर कर पाए दूकान की हर वस्तु चार डिफरेंटली एबल्ड लोग बनाते है। यहाँ आपको साबुन,मोमबत्ती,टॉयलेट क्लीनर,हैंडवाश आदि मिल जाएंगे सबसे अच्छी बात ये है की दुकानदार ना होने के बावजूद ये हर रोज़ 1000 रुपए तक कमा लेते है। दूकान के एंट्रेंस पर भी लिखा हैं की इस दूकान का कोई दुकानदार नहीं है। खुद प्राइस टैग देखे और पैसे डब्बे में डिपाजिट करदे दरअसल बहुत से विकलांग लोग ऐसे थे जिसमे बहुत सी छमता और क्रिएटिविटी थी लेकिन सीधी सी बात है उनका शरीर उन्हें मार्केटिंग करने की इज़ाजत नहीं देता था। साथ ही ना किसीको बल्क आर्डर आते थे। दूकान हर रोज़ सुबह 6 बजे खुल जाती है और रात के 10 बजे बंद होती है। दूकान में सीसी टीवी लगाया हुआ है। साथ ही आसपास के दुकानदार भी कुछ गलत न हो इसका ख्याल रखते है। एक नई सोच और साथ की ज़रूरत थी लोगो ने भी इसपर पूरा विश्वास दिखाया बस इसी तरह बिना दुकानदार की दूकान काबिलियत की सीडी चढ़ गई। वैसे अगर मौका मिले तो आप अपने इलाके के विकलांग लोगो ने लिए क्या करना चाहेंगे ?

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