एक भिखारी जो आज चलाता है २ स्कूल और अनाथालय

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जिसे कभी लोग भिखारी कहते थे आज पढ़ा रहा है गांव के बच्चो को बचपन सड़को पर भिख मांगते और रिक्शा चलाते गुज़रा और आज यह आदमी चला रहा है २ स्कूल और अनाथालय 7 साल का गाज़ी जलाउद्दीन अपने फर्स्ट आने की ख़ुशी लेकर घर आया था। जब उसे पता चला वो कभी दूसरी क्लास में नहीं जा सकता। क्यों के उनके पिता के पास किताबे खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। गाज़ी के पिता किसान थे और बहुत बार गरीबी की वजह से उनके परिवार को भूखा सोना पड़ता था। पिता की तबयत बिगड़ने लगी और किस्मत ने गाज़ी को रास्ते पर भीख मांगने पर मजबूर किया। 12 /13 साल में ही गाज़ी रिक्शा चलाने लगा 18 साल का होते ही उसने टैक्सी चलनी सिख ली 1977 में टैक्सी ड्राइवर बन गया सफर यही किम नहीं हुआ गाज़ी ने अपने गांव के 10 बच्चो को मुफ्त में गाड़ी चलने सिखाई और एकबर उनकी नौकरी लग जाने पर केवल 5 रूपए डोनट करने का कहा और अपने गांव के 2 और ज़रूरतमंद को टैक्सी सीखने का वादा लिया।आज इस चेन के वजह से गांव में 300 लड़के टैक्सी चलकर अपने परिवार का पेट भरते है। ग़ाज़ी की तरह दूसरे बच्चो को अपनी पढ़ाई न छोड़ने पड़े इसलिए वह अपने सवारियों से भी किताबे,दवाई आदि डोनट करने को कहते है। डोनेशन और बचत के पैसो से गाज़ी ने अपने दो कमरे के मकान में ही स्कूल शुरू कर दिया। 2012 तक 12 कमरे और 2 बाथरूम बनकर तैयार हो गए। गाज़ी के इस जोश को देख कर कई सवारियों ने उनकी सहायता की जिनमे स्कूल और अनाथालय के लिए ज़मीने और एक ने टीचर्स की पेमेंट की ज़िम्मेदारी ली। वैसे अगर मौका मिले तो आप अपने गांव के लिए क्या करना चाहेंगे ?

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