सुनिए बेहतरीन कौशिक शुक्ला और दीपांजन मल्लिक के बैंड “के &यु आई” को और साथ मे गुनगुनाए,जब ये पेश करेंगे निरंजन पेडनेकर द्वारा लिखा बेहद खूबसूरत संगीत “बुँदे “

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बूँदें बादलों में छुपी हैं
सासें धड़कनों में रुकी हैं
राह राह पर आहात सी है
 आह आह में चाहत सी है
क्यों हवा में है गहरा धुंआ
क्यों बिछी हुई है दूरियां
क्यों चिलमनों में गम हुआ है चेहरा तेरा
क्यों मंज़िलों में गम रास्ता हुआ है फिर भी
रातें करवटें ले रहीं हैं
बातें बांके शायरी खड़ी हैं
तारों का डेरा है फिर भी अन्धेरा है खोयी हो कहाँ
 बिन तेरे पूरा है फिर भी अधूरा है मेरा ये जहां
आना आज याद बन के आना
 गाना ज़िन्दगी को गुनगुनाना
 बात बात पर फिर हो नज़म
रात रात हो यादों से नाम

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