भगवान शिव की बहन के बारे में जानिये

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भगवान शिव के बारे में वैसे तो कई लोग काफी कुछ जानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं की भोलेनाथ की एक बहन भी थी जिनका नाम देवी असावरी था ? और भोलेनाथ ने माता पार्वती के कहने पर अपनी बहन देवी असावरी की रचना की थी।

दरअसल विवाह के बाद माता पार्वती जब कैलाश पर्वत आई उन्हें अपने घरवालों की बहुत ज़्यादा याद आ रही थी। हाँ वैसे तो उनसे बात करने और मन बहलाने के लिए कैलाश पर स्वयं भोले, और भक्त नंदी मौजूद थे। लेकिन इसके बावजूद माता कई बार अकेला महसूस करती थी। आखिर एक स्त्री अपने मन की कई बात एक स्त्री से जो बांटना चाहती है।

यही वजह हुई की माता पार्वती ने शिवजी से इस बारे में बात की और उनसे अपने दिल की बात कही। माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा की वो कैलाश में बहन जैसी सहचर की कामना रखती हैं जिसके साथ वो अपने विचारों को साझा कर सकें और भोले के ध्यान में जाने पर भी अपना दिन कैलाश पर व्यतीत कर सकें। शिव भी जानते थे की कैलाश पर सिर्फ पुरूष मौजूद है और ऐसी कई बातें होंगी जो माता उनसे नहीं कर पाएंगी इसलिए शिव ने उनकी ये इच्छा स्वीकार की।

इसपर भगवान शिव ने माता पारवती को सरस्वती माँ के कैलाश आने की बात सुझाई। लेकिन माता पारवती ने उन्हें बताया की माता सरस्वती अपने कर्तव्यों के कारण हर समय उनके साथ नहीं रह पाएंगी। उन्होंने शिव पर अपनी बहन बनाने की बात पर ज़ोर दिया जिसे शिव ने स्वीकार तो किया लेकिन माता के आगे शर्त राखी की माता को उनकी बहन का ध्यान अपनी पूरी ज़िन्दगी रखना होगा।

माता इस बात पर राज़ी हो गईं और सिव ने अपनी सम्पूर्ण शक्तियों के इस्तेमाल से अपनी जैसी बहन का ही निर्माण कर दिया। शिव की बहन देवी असावरी के लंबे और खुले बाल (अनकैप्मेट), फटे पैरों के साथ वह काफी मोती थी जो वस्त्र नहीं पहनती थी। पार्वती ननद के आने से काफी खुश हुई उन्हें नहलाया साफ़ कपड़े और गहने दिए हुर अपना काफी समय उनके साथ ही गुज़ारने लगी।

माता उन्हें स्वादिष्ट भोजन देती थी जिसे वो एक बार में ही खा जाती थीं और, और भी ज़्यादा खाने की मांग करती थी जो माता पारवती को लाचार कर देती थी। अब इस विषय में माता पारवती ने भोले से मदद मांगने की सोची और उनके पास जाने लगी लेकिन देवी असावरी ने उन्हें टंगड़ी लगा कर गिरा दिया और शरारत में उन्हें अपने फटे एड़ियों के बीच छुपा लिया।

सब जानते हुए भी जब शिव माता को ढूंढ़ने आए उन्होंने देवी से उनके बारे में पूछा जिसपर पहले तो उन्होंने जवाब नहीं दिया लेकिन बाद में अपने पेअर को ज़ोर से झटका जिसकी वजह से माता गिर पड़ीं। देवी के इस व्यव्हार से माता बहुत आहात हुई और शिव से उन्हें हटाने को कहा जिसपर शिव ने उनके वचन उन्हें याद दिलाए। माता ने उनसे माफ़ी मांगी और देवी को भेजने को कहा इसपर शिव ने कहा की वो देवी में अच्छा व्यव्हार भर उनकी शादी करवा देंगे।

इस बारे में सुनते ही माता ने कहा की ऐसे में तो वो खुद ही देवी असावरी को रख लेंगी। लेकिन इस बार शिव ने उनकी बात नहीं सुनी और अपने इस लीला से एक सीख भी समस्त संसार को दी और माता से कहा की जब आप किसी को उसके बुरे रूप में नहीं रख सकते तो उसके अच्छे रूप में भी नहीं रखना चाहिए।

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