जानिए कश्मीर की सबसे क्रूर रानी ‘दीदा’ के बारे में

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अपने ही पोतों को जान से मार डाला। ऐसी पत्थर दिल रानी के बारे में आज हम आपसे बात करेंगे। वैसे तो कश्मीर के इतिहास के बारे में कम ही लोग जानते है। लेकिन कश्मीर में भी ऐसे ऐसे ऐतिहासिक चरित्र है जिनके बारे में जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे।हम बात कर रहे है कश्मीर की रानी ‘दीदा रानी’ के बारे में। इसके लिए पहले हम 12 वी सदी के इतिहास लेखक ‘कलहाना’ को ध्यावाद करते है की उन्होंने कई राज्यों की रानियों के बारे लिखा। साथ ही हमे भी मौका दिया रानी दीदा के बारे में चर्चा करने का। रानी दीदा के बारे बताया गया है की वे बहुत ही क्रूर रानी थी। इतनी क्रूर के गद्दी पर बने रहने के लिए उन्होंने अपने पोतों तक को जान से मार डाला। वो ढीले नैतिकता वाली रानी थी जिससे केवल पावर के लिए भूखी थी।

कलहाना के अनुसार रानी दीदा लोहारा वंश (1003 CE – 1320 CE) के राजा सिम्हाराजा की बेटी थी। रानी बेहद खूबसूरत होने साथ साथ बहुत ही आलसी भी थी। इतनी ज़्यादा आलसी थी के उन्हें महिला पिट्ठू पीठ पर चढ़ाकर कर ले जाया करती थी। 26 वर्ष की उम्र में दीदा की शादी क्षेमागुप्ता, पार्वगुप्ता के बेटे से करा दी गई थी। जो उस वक़्त कश्मीर के सिंहासन पर थे। रीत के अनुसार पिता की मृत्यु के बाद उनके बेटे क्षेमागुप्ता गद्दी आ गए। लेकिन क्षेमागुप्ता एक कमज़ोर राजा प्रतीत हुए। क्षेमागुप्ता केवल शराब,जुआ और शिकार से प्रेम करते थे। परिणाम स्वरुप उनकी पत्नी यानी रानी दीदा ही राज्य संभालती थी। पितृसत्तात्मक समाज में एक नाड़ी का राज बहुत चुनौतियों से भी भरा था। 972 में जब उनके पुत्र की भी मृत्यु होगई तो राज गद्दी फिर से रानी के हाथ आ गई। अब तक रानी दीदा काफी शक्तिशाली बन चुकी थी। उनका नाम ही काफी था रोंगटे खड़े करने के लिए।

वैसे तो उन्हें एक अच्छा शासक माना गया है। उन्होंने अपने पति और बेटे के याद में बहुत से मंदिर भी बनवाए। बहुत से मंदिर उनके खुद के नाम पर भी है,जैसे श्रीनगर में शिव मंदिर जिसे दिद्दारा मथ कहते थे । हालांकि अब वाहा मंदिर नहीं है लेकिन जिस जगह मंदिर हुआ करता था उस जगह को दीदामर कहते है। कलहाना के मुताबिक समय के साथ साथ रानी दीदा में करवाहट बढ़ती गई और वो और क्रूर होती गई।

उन्होंने अपने 3 पोतों नंदिगुप्ता,त्रिभुवना,भीमगुप्ता का कतल तक कर दिया। सिर्फ और सिर्फ गद्दी पर बने रहने के लिए। रानी दीदा के बारे में ही कहा गया की उन्होंने तुंगा नाम के एक गुज्जर चरवाहा को अपना प्रेमी बना लिया था। इतना ही नहीं उससे अपने राज्य में मुख्यमंत्री तक बना दिया। ज़्यादार तक इस रानी के बारे में बुरा ही बताया गया है की उनका चरित्र खराब था,वो आलसी थी,क्रूर थी। लेकिन क्या ये सब आरोप सच में सही है या पितृसत्तात्मक समाज में अपनी पहचान बनानी की सजह? वैसे भी हम सभी जानते है दिल्ली की रज़िया सुल्तान पर भी आरोप था की उनका नाजायज़ संबंध याकूत नाम के अफ्रीकन दास के साथ था। लेकिन इस बात को बादमे इतिहासकारो ने गलत साबित कर दिया।

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