पंचकूला के पिंजोड़ गार्डन की रोचक कहानी

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बाग़ यानी गार्डन तो सभी बहुत खूबसूरत होते है। लेकिन आज हम आपको सभी बागो के राजा के बारे में बताने जा रहे है। हरयाणा ज़िले में स्तिथ “पंचकुला” के मुग़ल गार्डन के बारे में क्या आप जानते है ? पिंजौर गार्डन मुगलों की उत्कृष्ट उद्यान कला का जीता-जागता नमूना है।

आपको बताते है इसके बारे में। चंडीगढ़ से मात्र 22 किलोमीटर की दूरी पर पिंजौर एक बेहद खूबसूरत व प्राचीन शहर है। कहा जाता है कि इस शहर से कई कहानियां जुड़ी हुई हैं। इस शहर को ‘पंचपुरा’ के नाम से भी लोग जानते हैं। इसके पीछे एक कहानी है कि पांडव अपने वनवास के समय इसी जगह ठहरे थे।

जिस वजह से इसे इस नाम से भी सम्बोधित किया जाने लगा। फिदाई खान ने पिंजौर का निर्माण 17 शताब्दी में करवाया था उस समय फिदाई खान पंजाब के गवर्नर थे। इस ऐतिहासिक शहर में मुगलकाल व पटियाला शाही खानदान की कई यादें ज़िंदा हैं।

मुगलों ने उद्यानों में फलदार वृक्षों की फारसी शैली अपनाई थी। भारत के अन्य मुगल बागों की अपेक्षा पिंजौर गार्डन में फलों के बाग अभी भी सुरक्षित हैं। आम, लीची व जामुन के पेड़ यहां बहुतायत में हैं। यहाँ आमों की तो यहां इतनी किस्में हैं कि हर वर्ष आम प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जाता है।

पार्क का खाका चारबाग शैली पर आधारित है जो मुगल उद्यान पद्धति की विशेषता है। उद्यान में प्रवेश करने के लिए चार दरवाजे बने हैं जिनमें तीन बंद रहते हैं।

पिंजौर गार्डन की खूबसूरती तो आपके होश उड़ा ही देगी लेकिन उससे भी चौकाने वाली है इस बाग़ की कहानी। जिसने इसे बनाया वही इसका ज़्यादा देर तक मौका नहीं मिला इसे एन्जॉय करने का। जी हाँ। पिंजोड़ गार्डन के बनने के 7 साल बाद ही ये त्यागा हुआ बनगया। लोग कहते है यहाँ के लोकल भवाना के राजा को डर था की कही वो और भी ज़मीन मुग़लो को ना हार जाए।

इस डर से एक साज़िश रची गई। दरअसल उनदिनों गोइटर के बहुत केस हुआ करते थे। इसका कारन था नमक बेहद कम आयोडीन का होना जिनका लोग तब सेवन करते थे । इस तथ्य को राजा ने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया। उसने सभी पीड़ित लोगो को इक्क़ठा किया और उन्हें वाहा ले गया जहा गवर्नर और उसका परिवार आया हुआ था।यहाँ तक की उनको महल के स्टाफ ,माली आदि भी बना दिया गया। उन्हें विश्वास दिलाया गया के पिंजोड़ के हवा पानी में ही कुछ गड़बड़ है I आतंक फैला दिया गया के के पिंजोड़ में रहने से फैलेगी यह परेशानी। और फिर क्या होना था ? कोई वाहा रहना चाहा था।

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