भारत के बच्चे हैं पढ़ाई के मामले में पीछे ?

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भारत में बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता हो रही है कम। जी हाँ एनुअल स्टेटस ऑफ़ एजुकेशन रिपोर्ट के अनुसार साल 2008 से 2018 के बीच सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता में कमी आई है। कक्षा पांचवी के बच्चे जो दूसरी कक्षा की किताब पढ़ पाते हैं। साल 2008 में 53.1% थे जो गिर कर 2018 में 44.2 % हो गए हैं। यानी जीन बच्चों को अलजेब्रा और पोल्लुशण जैसे टॉपिक समझ आने चाहिए उन्हें बेसिक मैथ्स समझ नहीं आती।

पढ़ाई के मामले में सरकारी स्कूलों की हालत प्राइवेट स्कूलों से ज़्यादा ख़राब है ऐसा लोग मानते थे लेकिन अब आंकड़े भी कुछ ऐसा ही बता रहे हैं। साल 2008 में जहाँ सरकारी स्कूल के 53.1% बच्चे पढ़ पाते थे 2018 में ये घट कर 44.2% हो गई है , वहीँ प्राइवेट स्कूलसरकारी स्कूल से बेहतर तो है लेकिन हलकी गिरावट इसमें भी आई है। 2008 में जो पढ़ने की क्षमता 67.9% थी घट कर 65.1% हो गई है। स्कूलों में पढ़ाई के इस गिरते स्तर को देख कर ये सोचना लाज़मी है की देश का भविष्य किस ओर जा रहा है। क्या आपका बच्चा पांचवी पास से तेज़ है ?

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