कैसे जुगाड़ से डॉक्टरों ने बचाई जान

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जब कुछ ना हो तो जुगाड़ ही काम आता है। और इस बात के लिए डॉक्टर्स भी कोई एक्सेप्शन नहीं है 3 इडियट्स में भी आपने देखा होगा किस तरह जुगाड़ से प्रसव करते हुए दिखाया था। अब ऐसा ही कुछ जुगाड़ हक़ीकत में भी किया गया। दरअसल आयुर्विज्ञानीक संस्थान के चिकित्सको ने स्मार्ट फोन की रौशनी से गंभीर बिमारी से पीड़ित बच्चे की सांस नली में ट्यूब डालने में सफलता पाईमतलब स्मार्ट फोन ने साबित कर ही दिया की वो सच में स्मार्ट है। एक और किस्सा बताते है 2007 में ट्रैन में नागपुर के एम बी बी एस कर रहे लड़के ने चलती हुई ट्रैन में एक औरत की डिलीवरी की और उसने व्हाट्सअप का शुक्रियादा किया की इसकी मदद से वो अन्य मेडिकल स्टूडेंट्स और डॉक्टर के संपर्क में रह पाया। हैदराबाद के गाँधी अस्पताल में भी एक जुगाड़ ने बचाई 16 साल के बच्चे की जान क्युकी लड़के की वायु-नली ब्लॉक्ड थी। उसे ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए ट्यूब नहीं जा पा रही थी। तब डॉक्टरों ने नवजात शिशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले ट्यूब का इस्तेमाल किया इस जुगाड़ से बची बच्चे की जान क्या आपने भी जुगाड़ से अपना काम चलाया है?

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