नरेंद्र से कैसे बने स्वामी विवेकानद

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12 जनवरी को नेशनल यूथ डे कहा जाता है। स्वामी विवेक आनंद ने भी आज के दिन जन्म लिया था। वो हमेशा कहते थे की वो 40 साल से ज़्यादा नहीं जिएंगे ठीक 39 साल में उनकी मृत्यु हो गई। कोलकाता में जन्मे नरेंद्र नाथ आगे चलकर स्वामी विवेकानंद के नाम से मशहूर हुए। वैसे स्वामी जी की बात जब भी आती है। उनके शिकागो की स्पीच को याद किया जाता है। आखिर उसने दुनियाभर में भारत की अतुल्य विरासत और ज्ञान का डंका जो बजा दिया था। आज 155 साल बाद भी वो ख़ास है। वैसे आपको बतादे स्वामी विवेकानद ने केवल 47 % स्कोर किया था। अपने विश्वविद्यालय के एंट्रेंस परीक्षा में और वे बी ए पास है 56% के साथ वैसे तब के हिसाब से इतना लाना भी बहुत अच्छा माना जाता था। आपको आश्चर्य होगा ये भी जान कर के कभी स्वामी विवेकानद कभी समय बहुत बड़े नास्तिक बन गए थे। और ये तक कहते थे की भगवान् बोलकर कोई चीज़ नहीं होती विवेकानंद मूर्ति और धातु पूजा में नहीं मानते थे। यहाँ तक की गुरु रामकृष्ण के कहने पर भी उन्होंने उपासना करने से मना कर दिया।तभी रामकृष्ण ने कहा सभी दृष्टिकोणों से सत्य जानने का प्रयास करे मात्र 25 साल की उम्र में नरेंद्र ने गेरुआ वस्त्र धारण कर लिए यानी कि उन्होंने सन्यास ले लिया और निकल गए पूरे भारत की यात्रा पर।स्वामी विवेकानद ने पुरे विश्व को ज्ञान का इतना भंडार दिया है आपको उनकी कौन सी बात सबसे ज़्यादा प्रेरित करती है ज़रूर बताए

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