लिव-इन में सहमति से संबंध बनाना बलात्कार नहीं

0
60

 

लिव-इन पार्टनर के बीच सहमति से किया गया यौन संबंध बलात्कार नहीं । सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र एक डॉक्टर के ख़िलाफ़ ,नर्स द्वारा दर्ज प्राथमिकी को खारिज करते हुए ये कहा है । पिछले वर्ष ही सुप्रीम कोर्ट ने लिव इन में रहना वैध किया था । लेकिन लगातार आने वाले इन मामलों पर कोर्ट ने ये बात साफ़ की है बलात्कार और सहमति से किये गए यौन सम्भन्ध में अन्तर है और कोर्ट को ऐसे मामलों में सावधानी बरतनी होगी । अगर लिव-इन में सम्बन्ध गलत मंशा या इरादे से बनाई गई हो ,तो इंडियन पीनल कोर्ट के तहत विश्वासघात और धोखाधड़ी का मामला दर्ज होगा । दोनों पक्षों के बीच स्वीकार किए गए शारीरिक संबंध, आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) के तहत अपराध नहीं होंगे। आपको क्या लगता है क्या कोर्ट का ये फैसला सही है ?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here