क्या एक आम आदमी एवरेस्ट पर चढ़ सकता है

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अपनी ज़िन्दगी में एक बार हर उस इंसान को एवरेस्ट चढ़ने का ख्याल आया होगा जो कुछ मज़ेदार और अलग करना चाहते हैं । लेकिन क्या आठ घंटे की नौकरी और अपने सामान्य दिनचरिया के साथ देश का आम आदमी दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ में से एक माउंट एवरेस्ट पर चढ़ सकता है ? क्या चिकन , पकौड़े , पिज़्ज़ा , बिरयानी , रसगुल्ले , मसालेदार सब्ज़ियां इत्यादि खा कर एवेरेस्ट चढ़ने की सोच सकते हैं ?

पहाड़ों पर चढ़ना भी एक तरह का खेल है और दुनिया के किसी भी खेल को खेलने के लिए फिट होना बहुत ज़रूरी होता है । ब्लड प्रेशर , शरीर में फैट , या कोलेस्ट्रॉल इत्यादि परेशानियों और बीमारियों के साथ आप आसान से आसान खेल खेलते हुए भी जल्दी थक जाते हैं । आम आदमी का शरीर बहुत ज़्यादा खेल कूद के लिए तैयार नहीं होता क्योंकि खेलने के वक़्त आपके शरीर की सभी मांसपेशियां काम करती हैं ऐसे में अगर आपके शरीर में किसी भी तरह की कमी आपके मांसपेशियों और हड्डियों को कमज़ोर बनाती है जिसकी वजह से एक आम आदमी का अपनी सामान्य दिनचर्या के साथ एवरेस्ट जैसे पहाड़ पर चढ़ना नामुमकिन है ।

चलिये आपको बताते हैं कि अगर आप माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना चाहते हैं तो आपको इसके लिए क्या क्या करना होता है । माउंट एवेरेस्ट पर चढ़ने की कोशिश कई लोग करते हैं क्योंकि ये सबसे सुलभ पहाड़ों में से एक है। लेकिन इस पहाड़ पर चढ़ना जितना रोमांचक लगता है उतना ही ख़तरनाक भी है । एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए आपके शरीर का फिट होना बहुत ज़रूरी है । सबसे पहले जानते हैं इस पर्वत पर चढ़ने के लिए क्या स्वास्त आवश्यकताएं हैं ।

पहाड़ों पर चढ़ने के लिए आपका मानसिक और शारिरिक स्वास्त का उचित होना बहुत ज़रूरी है अच्छा होगा अगर आप इस बात की जांच कर लें कि आपका शरीर पर्वतारोहण करने के लिए तैयार है या नहीं । सही व्यायाम करने से आपका शरीर ऊंचाई पर चढ़ने के लिए तैयार होगा (किसी भी तरह के व्यायाम को करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें ) । पहाड़ों पर चढ़ने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है जिसके बाद ही आप इसको करने के लिए योग्य होंगे । वैसे इन्हें अचानक शुरू करने का कोई फायदा नही है ।

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माउंट एवेरेस्ट पर चढ़ने की चाहत रखते है तो धूम्रपान और शराब से दूरी रखनी होगी । इसके अलावा शरीर का सामान्य फिटनेस स्तर भी अच्छा होना चाहिए । ऊंचाई पर आपको दिक्कत न हो इसके लिए आपके हृदय का फिट होना भी बहुत ज़रूरी है । पहाड़ों पर चढ़ने का कुछ अनुभव भी एवेरेस्ट की चढ़ाई के लिये मायने रखता है । लेकिन अगर आपके पास अनुभव नहीं है तो शुरुआत से ही पर्वतारोहण की कोर्स करें और शुरूआती तौर पर कम एल्टीट्यूड की ऊंचाइयों पर चढ़ें क्योंकि ये ज़रूरी है कि आपका शरीर ऊँचे एल्टीट्यूड का सामना कर पाए । कोर्स करने के लिए आप नेहरू इंस्टिट्यूट ऑफ़ माउंटेनियरिंग (उत्तराखंड) , द कर्नाटक माउंटेनियरिंग एसोसिएशन (बैंगलोर) , या , हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टिट्यूट जा सकते हैं ।

हाई एल्टीट्यूड के लिए खुद को तैयार न रखने के नतीजे घातक हो सकते है क्योंकि ऐसे में आपकी जान भी जा सकती है । दरअसल 8000 मीटर की चढ़ाई वाले एरिया को डेथ जोन कहते हैं क्योंकि यहाँ से ऑक्सीजन की कमी होने लागतो है । अगर आपका शरीर इसके लिए तैयार नहीं है तो ये आपकी जान के लिए खतरा बन सकती है । 2017 में लगभग 648 लोग ट्रैकिंग के लिए गए थे जिनमें 6 लोगों की मौत हो गई क्योंकि वो सप्लीमेंट ऑक्सीजन का इतेमाल नहीं कर रहे थे । ये ज़रूरी है कि आप पहाड़ों पर चढ़ने से पहले अच्छि ट्रैनिंग लें और ऊंचाई पर आने वाली ख़तरनाक परिस्थितियों के लिए तैयार रहे ।

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ट्रेनिंग करने के अलावा ट्रैकिंग करने के लिए विशेष कपड़ों की आवश्यकता होती है क्योंकि पहाड़ों पर चढ़ने के लिए हम अपने सामान्य कपड़े तो नहीं पहन सकते । अलग अलग एल्टीट्यूड पर जाने के लिए अलग तरह के कपड़े होते हैं । ट्रैकिंग के वक़्त आपको चाहिए होंगे –

चढ़ाई के लिए उपकरण जैसे – एक्सेसरी कॉर्ड या प्री- कट प्रुसिक्स ,आइस एक्स ,क्रेम्पोन्स, कैराबिनेर सिस्टम, अल्पाइन क्लाइम्बिंग हार्नेस ,बेलै डिवाइस, ट्रैकिंग पोल्स, ऐसकेंडर

जूते : हाई एल्टीट्यूड ऑल इन वन बूट, कैंप बूट, इंसुलेटेड कैंप बूटीज़ ,लाइट हाईकिंग बूट्स या ट्रैकिंग शूज़, वूल या सिंथेटिक सॉक्स ,लाइनर सॉक्स

टेक्निकल कपड़े : बेसलेयर्स – टॉप एंड बॉटम ,हैवी बेसलेयर्स बॉटम्स, मिडलेयर टॉप ,ट्रैकिंग पैन्ट्स, सॉफ्टशेल पैन्ट्स और जैकेट , हार्दशेल पैन्ट्स और जैकेट, इंसुलेटेड सिंथेटिक हूडेड जैकेट, इंसुलेटेड डाउन पार्का, एक्सपीडिशन डाउन पार्का और पैन्ट्स, डाउन सूट, इंसुलेटेड सिंथेटिक पैन्ट्स

हांथों के लिए : लाइटवेट लाइनर ग्लव्स, शॉटशेल ग्लव्स, इंसुलेटेड शेल ग्लव्स, एक्सपीडिशन मिटेन्स

सर के लिए आपको चाहिए होंगे : क्लाइम्बिंग हेलमेट, बफ, सन हैट, बेलक्लावा सिस्टम, वूल या सिंथेटिक स्की हैट, फेसमास्क ,ग्लेशियर ग्लासेस, स्की गॉगल्स, नोज गॉर्ड, हेड लैंप

पर्सनल इक्विपमेंट : -40 डाउन स्लीप बैग , -20 डाउन स्लीपिंग बैग , स्माल पैक , 55 लीटर क्लाइम्बिंग पैक , इंफ्लाटेब्ल स्लीपिंग पैड , फोम पैड , चम्मच , मग , बाउल , चाकू , पी बोतल , पी फनल (महिलाओं के लिए), वॉटर बोतल पार्क्स , वॉटर बोतल , थरमस , ट्रैश कम्पेक्टर बैग , कैमरा , लार्ज डफल बैग , टोइलेट्री बैग , वॉटर प्यूरिफिकेशन टूल , सनस्क्रीन, लिप स्क्रीन , रनिंग शूज़, स्मॉल पर्सनल फर्स्ट ऐड किट , मेडिकेशन्स एंड प्रेस्क्रिप्शन्स , बेस कैंप कॉम्फोरर्स , हैंड एंड टो वर्मर्स , फ़ूड ।

एवरेस्ट पर ट्रैकिंग पर जाने के लिए आपको काफी सेविंग्स भी करनी पड़ेगी क्योंकि जितना मुश्किल इस पहाड़ पर चढ़ना है उतना ही इस ट्रैकिंग के लिए पैसे जुटाना । एवेरेस्ट पर जाने का न्यूतम खर्च लगभग 30  लाख तक है । अगर आप तिब्बत की ओर से जाएंगे तो आपको लगभग 26 लाख रूपए लगेंगे और नेपाल की ओर से जाने पर लगभग 30 लाख रूपए ।

ट्रैकिंग करने के लिए कुछ महीने बहुत अच्छे होते हैं और ऐसे समय पर ज़्यादा लोग ट्रैकिंग के लिए एवेरेस्ट पर आते हैं। अगर आप मार्च से मई महीने में ट्रैकिंग पर जाते है तो ये एक अच्छा समय है । ज़्यादातर लोग पतझड़ या वसन्त के मौसम में ट्रैकिंग पर जाते हैं ।

माउंट एवेरेस्ट पर ट्रैकिंग के लिए दुनिया में दो ही ऑथोराइज़ड ट्रेवल एजेंसी हैं जिन्हें लोगों को ट्रेकिंग करवाने की लाइसेंस दी गई है । इन एजेंसी के नाम हैं अल्पाइन असेंट्स इंटरनेशनल और माउंट एवेरेस्ट ट्रेवल कंसल्टेंट । ये एजेंसीज आपके ट्रेवल के समय के अनुसार आपका ट्रिप प्लान करती है । आप माउंट एवेरेस्ट तिब्बत या नेपाल की ओर से जा सकते हैं ।भारत से नेपाल की ओर ट्रेकिंग जाने के लिये आप अपने शहर से पहले दिल्ली के लिए ट्रेन लें और वाहन से नेपाल , काठमांडू के लिए फ्लाइट लें । काठमांडू पहुँचने के बाद आपकी एजेंसी आपको होटल ले कर जाएगी और आपके ग्रुप को ट्रिप के बारे में ब्रीफ करेगी।

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