बाहादुरी के नन्हे सिपाही

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भारत बंद का समय बहार पथराव और फायरिंग हो रही थी। ऐसे में ट्रैन में 6 घंटो से फसे भूखे यात्रियों के लिए10 साल की अद्रिका और उसका भाई कार्तिक पहुँचते है। दंगो से बचकर यात्रियों को खाना देने हैं ना गर्व की बात। दोस्तों ये कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि मध्यप्रदेश के मुरैना में हुई एक सत्य घटना है। बहादुरी की श्रेणी में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए इन बच्चो को चुना गया है और खुद राष्ट्रपति 24 जनवरी को इन बाहादुरी के नन्हे सिपाहयो को सम्मानित करेंगे। ज़ाहिर सी बात है हर माता पिता की तरह अद्रिका और कार्तिक के परिवारवाले चिंतित थे और तब इनको घर से बिना कुछ बताए चले जाने के लिए खूब डाट भी पड़ी थी। लेकिन अब इन्होने सभी का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। वैसे आप बहादुरी के इन नन्हे सिपाहियों से कितना प्रेरित हुए?

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