एसिड अटैक विक्टिम बनी बैंकर

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2011 एक और भयानक एसिड अटैक हादसा चेहरे और शरीर के ज़ख्म के साथ साथ मोहाली की एक महिला ने आखो की रौशनी भी खो दी थी। एसिड अटैक मतलब किसी की ज़िन्दगी को एक पल में तार तार कर देना। अपना ही चेहरा देखने से डर लगने लग जाता है।

लेकिन फिर कुछ लोग ऐसे भी होते है जो अपनी किस्मत खुद लिख देते है ऐसी ही मिसाल बानी मोहाली की इंदरजीत कौर नेत्रहीन और एसिड अटैक विक्टिम होने के बावजूद बनी बैंकर टाइम्स ऑफ़ इंडिया के एक रिपोर्ट के मुताबिक इंदरजीत अब दिल्ली के कनारा बैंक में क्लर्क के पद पर काम कर रही है। भारत में हर साल 250 -300 एसिड अटैक के रिपोर्ट हर साल आते है। और कई तो दर्ज़ होते तक नहीं किसी का चेहरा बरबाद कर। यु खुलेआम घूमते हो। किसी की रूह छीन कर कैसे खुदको इंसान कहते हो ?

 

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