रानी लक्ष्मीबाई के भूले हुए बेटे के बारे में 7 दिलचसप तथ्य

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झाँसी की रानी , रानी लक्ष्मीबाई को कोई नहीं भूल सकता। रानी लक्ष्मीबाई भारत के उन क्रांतिकारियों में से थीं जिन्होंने अंग्रेजी सरकार को धूल चटाई थी । 1857 के उनके विद्रोह को कोई नहीं भूल सकता । लेकिन इस युद्ध में जिस बच्चे को पीठ पर लेकर लड़ी उसके बारे में लोगो को बहुत कम ही मालूम है । रानी लक्ष्मीबाई के उस बेटे का नाम दामोदर राव था । दामोदर राव का जन्म साल 1849 में हुआ था चलिये आपको बताते हैं इनसे जुड़े कुछ तथ्य :-

1. तीन साल की उम्र में झाँसी के राजा गंगाधार राव ने दामोदर को गोद लिया था । इससे पहले की सभी कागज़ात मिले उनकी मृत्यु हो गई जिसके बाद रानी लक्ष्मीबाई ने उसकी ज़िम्मेदारी ली ।

2. वादा करने के बावजूद ब्रिटिश सरकार ने दामोदर राव के नाम पर रखी सात लाख की रकम उन्हें कभी नहीं दी । अपने जीवनकाल में राव ने ब्रिटिश सरकार से अपने कुछ हकों के लिए हाथ जोड़े ।

3 . 1857 का विरोध झाँसी की रानी से इसी संधर्ब में किया था।

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4. रानी लक्ष्मीबाई के वीरगति को प्राप्त होने के बाद दामोदर राव और उनके अभिभावकों को किसी ने भी ब्रिटिश अधिकारियों के डर से किसी ने पनाह नही दी । और जिसकी वजह से उन्होंने जंगल में आश्रय ली ।

5. अपने जीवन के कुछ क्षणों के बारे में दामोदर राव ने एक संस्मरण भी लिखी थी जिसमें उनके जीवन के कुछ पलों और संघर्षों के बारे में बताया है । इस संकरामन को इतिहासकार वाई एन केलकर ने अपनी मराठी किताब इतिहासाच्या सहेली में प्रकाशित किया था।

6. दामोदर राव नौ साल के थे जब उन्होंने रिफ्यूजी का जीवन बिताया था । पैसों की कमी होने की वजह से दामोदर को मजबूरन अपनी मासाहेब ( रानी लक्ष्मीबाई ) की उनके पास बची आखरी निशानी को बेचना पड़ा था ।

7. दामोदर राव शादी के बाद इंदौर में बस गए और 1904 में उन्हें एक पुत्र हुआ । उनकी मृत्यु बेटे के जन्म के महज़ दो साल बाद ही हो गया । उनका परिवार अब भी इंदौर में ही बसे हुए हैं ।

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